Saturday, September 14, 2024

Ganesha Chalisa Lyrics in Hindi, गणेश चालीसा

 Ganesha Chalisa Lyrics in Hindi, गणेश चालीसा  - Ganesha Chalisa - YouTube

जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल।।

 

जय जय जय गणपति गणराजूमंगल भरण करण शुभ काजू।
जै गजबदन सदन सुखदाता विश्व विनायक बुद्घि विधाता ।।

 

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन।
राजत मणि मुक्तन उर माला स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला।।

 

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं मोदक भोग सुगन्धित फूलं।
सुन्दर पीताम्बर तन साजित चरण पादुका मुनि मन राजित।।

 

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता गौरी ललन विश्वविख्याता।
ऋद्घिसिद्घि तव चंवर सुधारे मूषक वाहन सोहत द्घारे।।

 

कहौ जन्म शुभकथा तुम्हारी अति शुचि पावन मंगलकारी।
एक समय गिरिराज कुमारी पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी।।

 

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा।
अतिथि जानि कै गौरि सुखारी बहुविधि सेवा करी तुम्हारी।।

 

अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा।
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्घि विशाला बिना गर्भ धारण, यहि काला।।

 

गणनायक, गुण ज्ञान निधाना पूजित प्रथम, रुप भगवाना।
अस कहि अन्तर्धान रुप है पलना पर बालक स्वरुप है।।

 

बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना।
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं।।

 

शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं सुर मुनिजन। सुत देखन आवहिं।
लखि अति आनन्द मंगल साजा देखन भी आये शनि राजा।।

 

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं बालक। देखन चाहत नाहीं।
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो उत्सव मोर शनि तुहि भायो।।

 

कहन लगे शनि, मन सकुचाई का करिहौ। शिशु मोहि दिखाई
नहिं विश्वास उमा उर भयऊ शनि सों बालक देखन कहाऊ।।

 

पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा। 
गिरिजा गिरीं विकल है धरणी सो दुख दशा गयो नहीं वरणी।।

 

हाहाकार मच्यो कैलाशा शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा।
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो काटि चक्र सो गज शिर लाये।।

 

बालक के धड़ ऊपर धारयो प्राण, मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो।
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे।।

 

बुद्ध परीक्षा जब शिव कीन्हा पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा।
चले षडानन, भरमि भुलाई रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई।।

 

चरण मातुपितु के धर लीन्हें तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें।

धानी गणेश कही शिवाये हुए हर्षयो नभा ते सुरन सुमन बहु बरसाए।।

 

तुम्हरी महिमा बुद्ध‍ि बड़ाई शेष सहसमुख सके गाई।
मैं मतिहीन मलीन दुखारी करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी।।

 

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा जग प्रयाग, ककरा।
दर्वासा अब प्रभु दया दीन पर कीजै अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै।।

 

।।दोहा।।

 श्री गणेश यह चालीसापाठ करें धर ध्यान,  

नित नव मंगल गृह बसै,  लहे जगत सन्मान,

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,  ऋषि पंचमी दिनेश,
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश।।

Sunday, January 14, 2024

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं - भजन (Achyutam Keshavam Krishna Damodaram)

 

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

भजन - सजा दो घर को गुलशन सा, अवध में राम आए है

     YouTube - अवध में राम आए है

 सजा दो घर को गुलशन सा,

अवध में राम आए हैं,
अवध मे राम आए है,
मेरे सरकार आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,-2
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आएं हैं ।

पखारों इनके चरणों को, बहा कर प्रेम की गंगा,-2
बिछा दो अपनी पलकों को,-2
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आए हैं ।

तेरी आहट से है वाकिफ़,
नहीं चेहरे की है दरकार,
बिना देखेँ ही कह देंगे,
लो आ गए है मेरे सरकार,
लो आ गए है मेरे सरकार,
दुआओं का हुआ है असर,
दुआओं का हुआ है असर,
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आए हैं ।

सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध में राम आए हैं,
अवध मे राम आए है,
मेरे सरकार आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आएं हैं ।

Friday, January 12, 2024

Bhajan - Swati Mishra - Ram Ayenge lyrics in hindi

 Ram Ayenge - Lyrics in Hindi


[Swati Mishra "Ram Ayenge" के बोल]

[Intro]
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे
राम आएँगे-आएँगे, राम आएँगे
राम आएँगे-आएँगे, राम आएँगे

[Chorus]
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे

[Instrumental-break]

[Verse 1]
राम आएँगे तो आंगना सजाऊँगी
दिप जलाके दिवाली मनाऊँगी
राम आएँगे तो आंगना सजाऊँगी
दिप जलाके दिवाली मनाऊँगी

[Chorus]
मेरे जन्मो के सारे पाप मिट जाएंगे, राम आएँगे
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे

[Verse 2]
राम झूलेंगे तो पालना झुलाऊँगी
मीठे-मीठे मैं भजन सुनाऊँगी
राम झूलेंगे तो पालना झुलाऊँगी
मीठे-मीठे मैं भजन सुनाऊँगी
[Chorus]
मेरी जिंदगी के सारे दुःख मिट जाएँगे, राम आएँगे
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे

[Verse 3]
मैं तो रूचि-रूचि भोग लगाऊँगी
माखन मिश्री मैं राम को खिलाऊंगी
मैं तो रूचि-रूचि भोग लगाऊँगी
माखन मिश्री मैं राम को खिलाऊंगी

[Chorus]
प्यारी-प्यारी राधे, प्यारे श्याम संग आएँगे, राम आएँगे
राम आएँगे-आएँगे, राम आएँगे
राम आएँगे-आएँगे, राम आएँगे

[Outro]
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे